*जल जीवन मिशन से बदली ग्राम डोंगिया की तस्वीर, हर घर तक पहुंचा स्वच्छ पेयजल*



*घर-घर नल से जल मिलने से महिलाओं को मिली राहत, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता में आया सकारात्मक बदलाव*


           सक्ती, 22 जुलाई 2026/ विकासखंड जैजैपुर के अंतर्गत स्थित ग्राम डोंगिया में कभी पेयजल की गंभीर समस्या हुआ करती थी। गांव की महिलाओं को पीने के पानी के लिए दूर-दराज के स्रोतों, कुओं एवं हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ता था। पानी लाने में काफी समय और मेहनत लगती थी, जिससे उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव के प्रत्येक घर तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचने लगा है, जिससे ग्रामीणों के जीवन में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आया है। ग्राम डोंगिया की कुल जनसंख्या 1365 है तथा गांव में 334 परिवार निवासरत हैं। जल जीवन मिशन के तहत सभी 334 परिवारों को नल कनेक्शन प्रदान कर घर-घर तक पेयजल पहुंचाया गया है। इससे ग्रामीणों को नियमित रूप से स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो रहा है। गांव की निवासी श्रीमती पूजा बाई बताती हैं कि पहले गांव में पेयजल की समस्या के कारण महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई बार दूर से पानी लाना पड़ता था, जिससे समय और श्रम दोनों की अधिक आवश्यकता होती थी। अब घर पर ही नल से पानी मिलने से उनकी यह परेशानी पूरी तरह समाप्त हो गई है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण सुविधा के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। जल जीवन मिशन के माध्यम से न केवल घर-घर पेयजल पहुंचा है, बल्कि गांव में रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। परियोजना के संचालन एवं रखरखाव के लिए स्थानीय लोगों को नल जल मित्र (पंप ऑपरेटर) तथा इलेक्ट्रिशियन के रूप में कार्य करने का अवसर मिला है। योजना के तहत प्रत्येक ग्रामीण को प्रतिदिन निर्धारित मात्रा में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के अंतर्गत महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में भी विशेष प्रयास किए गए हैं। गांव की पांच महिलाओं को पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। प्रशिक्षित महिलाएं फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से नियमित रूप से पेयजल की जांच कर रही हैं, जिससे जल गुणवत्ता की सतत निगरानी सुनिश्चित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन ने उनके जीवन को पहले की अपेक्षा अधिक सहज, सुरक्षित और बेहतर बनाया है। घर पर ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से महिलाओं का सम्मान बढ़ा है, बच्चों की शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है तथा पूरे गांव में स्वास्थ्य और स्वच्छता की स्थिति मजबूत हुई है। स्वच्छ पेयजल मिलने से डायरिया, हैजा एवं अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में कमी आई है। साथ ही लोगों में स्वच्छता, हाथ धोने तथा जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।

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