मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को ही खत्म करके श्रमिकों से काम का अधिकार छीना है। —– पूर्व मंत्री उमेश पटेल…

 


सक्ती । अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर “मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत उमेश पटेल पूर्व मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, प्रशांत मिश्रा कार्यक्रम समन्वयक, श्रीमती रश्मि गवेल अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी, सक्ती सहित वरिष्ठ नेतागण ने आज 10 जनवरी शनिवार को दोपहर 2 बजे स्थानीय विश्रामगृह परिसर में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया । पत्रकार वार्ता की पूर्व वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने महात्मा गांधी और डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के तेल चित्र पर पुष्प माला अर्पित कर महात्मा गांधी अमर रहे और कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद के नारे भी लगाए ।

               इस अवसर पर पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने कहां की मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को ही खत्म करके श्रमिकों से काम का अधिकार छीना है। मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदर्शों पर कुठाराघात है, मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है। मोदी सरकार ने “सुधार” के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोज़गार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छीनने की जान-बूझकर की गई कोशिश है।

अब तक, मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फ्रेमवर्क ने इसे एक कंडीशनल, केंद्र द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्कीम में बदल दिया है। मनरेगा गांधीजी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और डिसेंट्रलाइज्ड डेवलपमेंट के सपने का जीता-जागता उदाहरण था, लेकिन इस सरकार ने न सिर्फ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मज़दूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचला है। दो दशकों से, मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए लाइफलाइन रहा है और कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक सुरक्षा के तौर पर ज़रूरी साबित हुआ है। अब तक मनरेगा मजदूरों को काम देने का कानून था, श्रमिक अधिकार पूर्वक मांग करते थे, जिसे योजना में परिवर्तित कर दिया गया, अब इसे चलाना/नहीं चलाना सरकार की मर्जी पर निर्भर होगा। मनरेगा के तहत, सरकारी ऑर्डर से कभी काम नहीं रोका गया। नया सिस्टम हर साल तय टाइम के लिए जबरदस्ती रोज़गार बंद करने की इजाज़त देता है, जिससे राज्य यह तय कर सकता है कि गरीब कब कमा सकते हैं और कब उन्हें भूखा रहना होगा। एक बार फंड खत्म हो जाने पर, या फसल के मौसम में, मज़दूरों को महीनों तक रोजगार से दूर रखा जा सकता है।

            मनरेगा केंद्रीय कानून था, 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा भेजे जाते थे, अब केंद्र और राज्य का हिस्सा 60- 40 का हो जाएगा, पहले मैचिंग ग्रांट 50 प्रतिशत राशि राज्य जमा करेगी तब केंद्र सरकार राशि जारी करेगा, राज्यों की वित्तीय स्थिति सर्वविदित है। इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी। मोदी सरकार अब राज्यों पर “जी राम जी” का लगभग 50,000 करोड़ का बोझ डालना चाहती है, उन्हें 40 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मनरेगा योजना देश के गरीब से गरीब लोगों के लिए रोजगार का सहारा थी, जो कोरोना जैसे मुश्किल हालातों में भी उनके साथ थी। इसलिए ये बिल गरीब-मजदूरों के खिलाफ है।

       100 दिन से 125 दिन की मजदूरी वाली बात सिर्फ एक चालाकी है, वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 70 प्रतिशत गांव में भाजपा की सरकार आने के बाद से अघोषित तौर पर काम नहीं दिया -जा रहा है। पिछले 11 सालो में मोदी सरकार बनने के बाद मनरेगा में काम देने का राष्ट्रीय औसत मात्र 38 दिनों का है। मतलब 11 सालो में मोदी सरकार किसी भी साल 100 दिन काम नहीं दे पाई। मनरेगा काम करने का सही अधिकार था, उसे अब एक एडमिनिस्ट्रेटिव मदद में बदला जा रहा है, जो पूरी तरह से केंद्र की मर्जी पर निर्भर है। भाजपा भगवान राम के नाम पर एक बार फिर झूठ बोल रही है। “V.B.G.RAM.G.” में जो राम जी बता रहे उसमें कही भी भगवान राम नहीं है। “V.B.G.RAM.G.” का फूल फार्म है (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन-ग्रामीण) है।

उमेश पटेल ने बताया ..मनरेगा को कैसे कमजोर किया..

मनरेगा में.हर परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के काम की कानूनी गारंटी मिलती थी । (पहले था) अब आपके पास कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी । हर गांव में काम की कानूनी गारंटी मिलती थी (पहले था) अब काम केवल मोदी सरकार द्वारा चुने गए गांवों में ही मिलेगा । आप पूरे साल काम की मांग कर सकते थे(पहले था) अब फसल कटाई के मौसम में आपको काम नहीं मिलेगा । आपको कानूनी न्यूनतम मज़दूरी की गारंटी दी गई थी (पहले था) अब आपकी मजदूरी सरकार अपनी मर्जी से तय करेगी । ग्राम पंचायत के जरिए अपने ही गांव के विकास के लिए काम मिलता था (पहले था) अब आप कहां और क्या काम करेंगे, यह सरकार तय करेगी । आपके काम में मनरेगा मेट और रोजगार सहायकों की मदद मिलती थी। (पहले था) अब आपको किसी मेट या रोजगार सहायक की मदद नहीं मिलेगी । आपकी मज़दूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इसलिए राज्य सरकार बिना किसी चिंता या कठिनाई के आपको काम उपलब्ध कराती थी (पहले था) अब राज्य सरकारों को आपकी मजदूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा खुद देना होगा- खर्च बचाने के लिए हो सकता है राज्य मजदूरों को काम ही न दें ।

               पत्रकार वार्ता को चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव ने भी संबोधित किया । इस अवसर पर उमेश पटेल पूर्व मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, प्रशांत मिश्रा कार्यक्रम समन्वयक, श्रीमती रश्मि गवेल अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी , श्रीमती मोनिका जायसवाल ,अलका जायसवाल, जामपाली सरपंच श्रीमती कलावती, हाजरा बेगम ,कुसुम लता आजगले, गीतादेवांगन,ठाकुर गुलज़ार सिंह, कन्हैया कंवर,अमित राठौर ,राकेश रोशन महंत, राजीव जायसवाल, राइस किंग खुटे, महबूब खान ,पिंटू ईश्वर लोधी , सत्य प्रकाश महंत, सफीक खान, सादेश्वर गबेल, रथ लाल पटेल, लाला सोनी, लालू प्रधान (पार्षद) सहित शक्ति जिले के अन्य कांग्रेस नेता अधिक संख्या में उपस्थित रहे। पत्रकार वार्ता कार्यक्रम का संचालन कांग्रेस नेता गिरधर जायसवाल ने किया एवं आभार प्रदर्शन ठाकुर गुलज़ार सिंह ने किया ।

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