रायगढ़, बिलासपुर सहित कई जिलों के पालकों का बढ़ा विश्वास, दूर-दराज़ से बच्चों ने लिया प्रवेश
शासकीय आदिवासी बालक आश्रम, मसनियाखुर्द में नवीन शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ पर शाला प्रवेश उत्सव उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्राम पंचायत मसनियाखुर्द के सरपंच श्री जयंत जांगड़े थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर, पुष्पमाला पहनाकर, गुलाल, मिठाई, पुस्तक एवं पेन भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया।
इस वर्ष आश्रम में रायगढ़, बिलासपुर, सक्ती, घरघोड़ा, तमनार, खरसिया एवं जैजैपुर क्षेत्र से विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। इनमें विक्रम राठिया (खरसिया), लोमस राठिया (तमनार), कृष्णा राठिया, गगन, मिथलेश राठिया (घरघोड़ा), निहाल सिंह सिदार (सक्ती) तथा दिव्यांश उरांव (सक्ती) सहित अन्य विद्यार्थियों ने नवीन सत्र में प्रवेश लेकर अपनी शैक्षणिक यात्रा प्रारंभ की।
मुख्य अतिथि श्री जयंत जांगड़े ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों की माताओं का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि "यह हमारे ग्राम और आश्रम परिवार के लिए गर्व का विषय है कि रायगढ़ एवं बिलासपुर जैसे अन्य जिलों के पालक भी अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए मसनियाखुर्द आश्रम का चयन कर रहे हैं। यह संस्था की गुणवत्ता, अनुशासन एवं शिक्षकों की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। हमें विश्वास है कि आश्रम के प्रधान पाठक, शिक्षक एवं कर्मचारी सभी बच्चों की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।"
प्रधान पाठक श्री शैलकुमार पांडेय ने कहा कि आश्रम का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सुरक्षित, संस्कारयुक्त एवं प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने पालकों द्वारा व्यक्त विश्वास के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर समर्पित रहने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी नवप्रवेशी विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों एवं अतिथियों के साथ सामूहिक भोज का आयोजन किया गया, जिसने पूरे आयोजन को पारिवारिक एवं आत्मीय स्वरूप प्रदान किया।
इस अवसर पर सहायक शिक्षक जीवनलाल चौहान, ग्राम सरपंच जयंत जांगड़े, योगेश गिरी गोस्वामी, भुवन कंवर, रामलाल सिदार, यशवंत कोशले, देव साहू, पूनम सिदार, अंजू सारथी, जमुना सारथी, दुर्योधन राठिया, बिहारी राठिया, मोहितराम राठिया, रामनाथ, गौरी कंवर, तेजराम डनसेना, निर्मला डनसेना, देवमती राठिया, जयंती राठिया, लालीमा राठिया सहित खरसिया, तमनार, घरघोड़ा, जैजैपुर एवं सक्ती क्षेत्र से आए बड़ी संख्या में पालक एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
शासकीय आदिवासी बालक आश्रम, मसनियाखुर्द लगातार अपने नवाचारों, अनुशासित वातावरण, पर्यावरण संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण एवं छात्र-केंद्रित गतिविधियों के कारण क्षेत्र के साथ-साथ अन्य जिलों के पालकों का भी विश्वास अर्जित कर रहा है।

0 टिप्पणियाँ