सक्ती / स्थानीय विश्राम गृह में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष रश्मि गबेल ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर देश में लगातार भ्रम फैला रही है, जबकि हकीकत में वह आरक्षण की आड़ में अपना राजनीतिक एजेंडा साधने की कोशिश कर रही थी।
*131वां संशोधन बिल: महिला हित या राजनीतिक साजिश?*
रश्मि गबेल ने हाल ही में संसद में गिरे 131वें संविधान संशोधन विधेयक का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा महिला आरक्षण को केवल एक 'मुखौटे' के रूप में इस्तेमाल कर रही थी। उन्होंने बताया कि इस बिल के जरिए भाजपा का असली उद्देश्य लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करना और अपनी सुविधा के अनुसार परिसीमन संशोधन बिल को पास कराना था। वही गबेल ने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा जब 2026-27 की जनगणना शुरू होने वाली है, तो भाजपा 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने की जिद क्यों कर रही है, उन्होंने आगे कहा की कांग्रेस और विपक्षी दल वर्तमान सदस्य संख्या में ही 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू करने को तैयार हैं, फिर सरकार परिसीमन का इंतजार क्यों कर रही है।वही नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023, जो पहले ही कानून बन चुका है, वह 2036 से प्रभावी होगा। कांग्रेस चाहती है कि इसे तत्काल लागू किया जाए।
प्रेस वार्ता के दौरान जिला अध्यक्ष ने कांग्रेस के इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि पंचायतों और स्थानीय निकायों में आज जो महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं, वह कांग्रेस की ही देन है।
1989: राजीव गांधी ने पहली बार पंचायतों में एक-तिहाई आरक्षण का बिल लाया। 1993: पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार ने इसे कानून का रूप दिया। 2010: डॉ. मनमोहन सिंह सरकार ने संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण बिल राज्यसभा से पास कराया था।
*विपक्ष की एकजुटता ने नाकाम किया भाजपा का षड्यंत्र*
रश्मि गबेल ने दो टूक शब्दों में कहा कि भाजपा का 'सीटों के परिसीमन' का गुप्त एजेंडा विपक्ष की एकजुटता के कारण विफल हो गया है। अपनी विफलता को छिपाने के लिए अब भाजपा यह झूठ फैला रही है कि विपक्ष ने महिला आरक्षण का समर्थन नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के समर्थन में कल भी थी, आज भी है और हमेशा रहेगी, लेकिन वह आरक्षण की आड़ में भाजपा को लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ नहीं करने देगी।

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