अभी संभले भी नहीं थे कि फिर आ पड़ी नई मुसीबत; ब्लैकआउट की आशंका से सहमे नागरिक
सक्ती: सक्ती क्षेत्र के लोगों की किस्मत में जैसे राहत लिखी ही नहीं है। अभी मुश्किल से दो दिन ही हुए थे जब पिछले मौसम की मार से हालात थोड़े सामान्य हुए थे, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। क्षेत्र में एक बार फिर आए इस भीषण तूफान ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। दो दिन की शांति के बाद अचानक आई इस दूसरी बड़ी मुसीबत ने पूरे प्रशासन और आम जनता को घुटनों पर ला दिया है।
इस नए तूफान के दस्तक देते ही सबसे बड़ा झटका क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था को लगा है, जिससे एक बार फिर पूरे इलाके में लंबे बिजली संकट (ब्लैकआउट) का खतरा मंडराने लगा है।
दोबारा टूटी बिजली व्यवस्था: अंधेरे में डूबने की कगार पर सक्ती
पिछले तूफान में क्षतिग्रस्त हुए बिजली के खंभों और तारों को विभाग ने दो दिन की कड़ी मशक्कत के बाद जैसे-तैसे ठीक किया था। लेकिन इस नए तूफान की तेज हवाओं ने सुधरी हुई व्यवस्था को फिर से तहस-नहस कर दिया है:
फिर शुरू हुआ फॉल्ट और ट्रिपिंग का दौर: तूफान शुरू होते ही सुरक्षा के लिहाज से और कई जगहों पर तकनीकी खराबी आने के कारण बिजली बंद कर दी गई है।
बिजली कर्मचारियों की बढ़ी चुनौती: दो दिन पहले ही राहत कार्य पूरा कर लौटे बिजली विभाग के कर्मचारियों के सामने फिर से वही बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। जगह-जगह पेड़ गिरने से लाइनें फिर से टूट गई हैं।
पेयजल और जरूरी सेवाएं होंगी प्रभावित: बिजली गुल होने से सीधा असर मोबाइल नेटवर्क, पानी की सप्लाई और अस्पतालों जैसी जरूरी सेवाओं पर पड़ना तय माना जा रहा है।
"अभी तो संभले भी नहीं थे..." – जनता का फूटा दर्द
स्थानीय नागरिकों का कहना है: "मुश्किल से दो दिन पहले घर की बत्ती जली थी, जिंदगी पटरी पर लौट ही रही थी कि फिर से यह आफत आ गई। अब पता नहीं यह तूफान कितना नुकसान करेगा और कितने दिनों तक हमें बिना बिजली के अंधेरे में गुजारना पड़ेगा।"
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
लगातार दूसरी बार आई इस आपदा ने प्रशासनिक अमले को भी हैरान कर दिया है। राहत और बचाव कार्य जो दो दिन पहले थमा था, उसे दोबारा युद्ध स्तर पर शुरू करने की तैयारी की जा रही है। विद्युत विभाग के सूत्रों का कहना है कि तूफान थमते ही नुकसान का जायजा लिया जाएगा, लेकिन हालात देखकर लगता है कि बिजली व्यवस्था बहाल होने में इस बार भी लंबा वक्त लग सकता है।
सक्ती की जनता इस समय भारी लाचारी और डर के साए में है। अब देखना यह है कि यह नई मुसीबत कब टलती है और प्रशासन इस बार कितनी मुस्तैदी से काम करता है।

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