दृष्टिबाधित बेटी की सफलता के पीछे मां का संघर्ष: लीनेस क्लब सक्ती ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 'किया मां-बेटी का सम्मान

 


सक्ती | अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 'ऑल इंडिया लीनेस क्लब्स CG-1' की अग्रणी शाखा लीनेस क्लब सक्ती द्वारा एक गौरवशाली सम्मान समारोह आयोजित किया गया। डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट 'मां से बेटी सवाई' (बेटी मां से बढ़कर है) के तहत क्लब ने बाराद्वार की होनहार बेटी आकांक्षा सिंह और उनकी माता सुमन सिंह को सम्मानित कर समाज के सामने एक मिसाल पेश की।

संघर्ष और सफलता की अनूठी कहानी

कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण आकांक्षा सिंह की जीवन यात्रा रही। स्कूली शिक्षा के दौरान ही आकांक्षा ने अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी, लेकिन इस कठिन समय में उनकी माता सुमन सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी लगन और अटूट मेहनत से न केवल आकांक्षा का हौसला बढ़ाया, बल्कि उनकी पढ़ाई भी पूरी करवाई।

आज आकांक्षा सिंह अपनी मां के संघर्षों को सार्थक करते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी कोरबा में असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं। क्लब ने यह संदेश दिया कि एक सशक्त मां ही एक सशक्त बेटी का निर्माण करती है।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

लीनेस क्लब सक्ती की चार्टर अध्यक्ष शहनाज बानो के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी रही। इस अवसर पर मुख्य रूप से:

डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर: डॉ. शालू पाहवा

पदाधिकारी: क्लब सचिव निकहत करीम मलिक, कोषाध्यक्ष प्रिया दुबे, पूर्व अध्यक्ष विजिया जायसवाल।

सदस्य: अनीता सिंह, मंजु जायसवाल, अल्का कंवर, रीता राज, ललिता साहु, मीरा देवांगन, विनिता जायसवाल, निधि सिंह, मनीषा भारद्वाज, अनीता राठौर, कुशल दर्शन और जमुना जायसवाल।

जूनियर क्लब सक्ती की अध्यक्ष पायल साहू और कोषाध्यक्ष रागिनी साहू सहित अन्य सदस्य भी इस गौरवपूर्ण पल के साक्षी बने।

"बेटी सिर्फ एक संतान नहीं, बल्कि एक महिला के रूप में शक्ति का स्वरूप है। आकांक्षा और उनकी माता का संघर्ष हम सभी के लिए प्रेरणा है।" — शहनाज बानो, चार्टर अध्यक्ष

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