‎श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने पहुंचे राजा धर्मेन्द्र सिंह और पंडित देवेन्द्रनाथ अग्निहोत्री ‎



‎ग्राम सरजुनी के दीनदयाल गबेल जी के यहाँ आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन कथा में शामिल हुए सक्ती राजा धर्मेन्द्र सिंह एंव पंडित देवेन्द्रनाथ अग्निहोत्री और कथाव्यास से आशीर्वाद प्राप्त किया।उन्होंने व्यासपीठ को नारियल भेंट कर श्रीकृष्ण की बाल मूर्ति को माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित कर आरती मे शामिल हुए। कथावाचक आचार्य श्री राजेन्द्र महाराज जी ने उधव चरित्र, रुखमाणी विवाह का वर्णन किया। कथावाचक ने कहा कि गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरी करने का वचन दिया। अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने महारास का आयोजन किया। यमुना तटपर कृष्ण बांसुरी की धुन सुनकर सभी गोपियां अपनी सुध-बुध खोकर कृष्ण के पास पहुंच गईं। इसके बाद भगवान ने रास आरंभ किया। माना जाता है कि वृंदावन स्थित निधिवन ही वह स्थान है, जहां श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। यहां भगवान ने एक अद्भुत लीला दिखाई थी, जितनी गोपियां उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरूप प्रकट हो गए। सभी गोपियों को उनका कृष्ण मिल गया और दिव्य नृत्य व प्रेमानंद शुरू हुआ। रुखमणी विवाह का वर्णन करते हुऐ कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया। मौके पर आयोजक मंडली की ओर से आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत कर विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गया।नगरवाशी बाराती बने।ऐसा प्रतीत हुआ कि सचमुच की शादी हो रही है। कथा के साथ-साथ भजन संगीत भी प्रस्तुत किया गया। 

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