पर्यावरण सहित राजस्व विभाग के क्रियाकलापों पर उठ रहे सवाल
सक्ती। जिले के डभरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत सकराली में बोराई नदी को राखड़ माफियाओं द्वारा निशाना बनाया गया है, वहीं नजदीक के नाले को पाट दिया गया है, जिससे लोगों में आक्रोश का माहौल है।
ज्ञात हो कि ग्राम पंचायत सकराली में इन दिनों राखड़ माफियाओ द्वारा बड़ा खेल किया जा रहा है, वहीं राखड़ के निपटान संबंधी बने नियमों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही है, इस संबंध में जो जानकारी मिली है उसके अनुसार सरपंच पति, हाउस और शिवम पैकेजिंग द्वारा राखड़ के इस खेल को खेल गया है वहीं पर्यावरण विभाग सहित राजस्व विभाग के क्रियाकलाप पर भी सवाल उठ रहें हैं । नियम कहता है कि पॉवर प्लांट से निकलने वाले राखड़ के निपटान के लिए कुछ गाइड लाइन बनाई गई है जिसमे जल स्रोत से 500 मीटर के अंदर किसी भी तरह का राखड़ डंप नहीं किया जाना है, वहीं जिस जगह पर लोगों का लगातार आवागमन है वहां राखड़ ना उड़े उसकी व्यवस्था की जानी है लेकिन सकराली में सभी नियमों का मखौल उड़ाया जा रहा है, राखड़ डंपिंग हेतु राजस्व विभाग द्वारा मौका मुआयना किया जाता है उसके बाद एनओसी दी जाती है फिर पर्यावरण विभाग को अग्रिम कार्यवाही हेतु दस्तावेज प्रस्तुत किया जाता है जहां विभाग के निरीक्षक द्वारा स्थल निरीक्षण करने उपरांत संबंधित पॉवर प्लांट को राखड़ निपटान के लिए आदेश दिया जाता है, लेकिन सकराली में जिस तरह से राखड़ का खेल खेला जा रहा है उसमें लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों द्वारा बिना स्थल निरीक्षण के आगे की कार्यवाही करते हुए राखड़ माफियाओं को लाभ पहुंचाने का काम किया गया है, वहीं पर्यावरण विभाग के ऊपर भी लोगों द्वारा मोटी रकम लेकर आदेश देने की बात कही जा रही हैं, जिस जगह पर लोगों का लगातार आवागमन है वहां राखड़ ना उड़े उसकी व्यवस्था की जानी है लेकिन सकराली में सभी नियमों का मखौल उड़ाया जा रहा है, राखड़ डंपिंग हेतु राजस्व विभाग द्वारा मौका मुआयना किया जाता है उसके बाद एनओसी दी जाती है फिर पर्यावरण विभाग को अग्रिम कार्यवाही हेतु दस्तावेज प्रस्तुत किया जाता है जहां विभाग के निरीक्षक द्वारा स्थल निरीक्षण करने उपरांत संबंधित पॉवर प्लांट को राखड़ निपटान के लिए आदेश दिया जाता है, लेकिन सकराली में जिस तरह से राखड़ का खेल खेला जा रहा है उसमें लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों द्वारा बिना स्थल निरीक्षण के आगे की कार्यवाही करते हुए राखड़ माफियाओं को लाभ पहुंचाने का काम किया गया है, वहीं पर्यावरण विभाग के ऊपर भी लोगों द्वारा मोटी रकम लेकर आदेश देने की बात कही जा रही हैं, जिस जगह में राखड़ डंप किया गया है वहीं नाला है साथ ही महज दस मीटर की दूरी में बोराई नदी है साथ ही बारिश के समय उक्त स्थल डुबान क्षेत्र में आता है। पर्यावरण के जानकारों का मानना है कि जिस तरह से संबंधित विभागों द्वारा आदेश जारी किया जा रहा है उससे लगता है कि छत्तीसगढ़ शासन के अधीन विभाग पॉवर प्लांट और राखड़ माफियाओं के लिए कार्य कर रहें है । वहीं सरपंच पति पर भी मोटी रकम लेकर प्रस्ताव देने की बात भी सामने आ रही है । इस संबंध में जब क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी बिलासपुर श्रीमति रश्मि श्रीवास्तव से दूरभाष में जानकारी लेने संपर्क साधने की कोशिश की गई वहीं व्हाट्सएप के माध्यम से भी जानकारी साजा की गई लेकिन उनकी ओर से किसी भी प्रकार की जानकारी साझा नहीं की गई ना ही फोन उठाया गया।

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