*विकासखण्डों की ग्राम पंचायतों में कृषि पखवाड़ा का किया जा रहा आयोजन,कृषि पखवाड़ा अंतर्गत किसानों को फसल विविधीकरण व जैविक खेती के लिए किया जा रहा जागरूक*



        सक्ती, 20 फरवरी 2026// कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के मार्गदर्शन में जिले के समस्त विकासखण्डों की ग्राम पंचायतों में 13 फरवरी 2026 से 03 मार्च 2026 तक कृषि पखवाड़ा अंतर्गत कृषक चौपालों का व्यापक आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में ग्राम पंचायत भद्रीपाली, बासीनपाठ, मानिकपुर, पलाड़ीखुर्द, लहंगा, मोहगांव, जर्वे , पोरथा, भेडापाली, जुनवानी, परसदाखुर्द, जोंग़रा, अमलडीह, सोंठी ,सुकलीपाली, बुंदेली, गोरखापाली, ढिमानी, पोता, कनईडीह, कलमी, चरौदा, अड़भार , सारसकेला, बरभाठा, अचरितपाली, घोघरी , कुरदी, बालपुर , लटेसरा, मड़वा, छोटे कटेकोनी, सिंघितराई , चुरतेली,  जवाली,, कुरदी, बालपुर, लटेसरा, मड़वा, बगरैल, चूराघाठा, तेन्दुमुड़ी, मांजरकुद, दर्री, साल्हे, अकोलजमोरा, बलकरी, कलमीडीह, आमापाली, सलनी, दर्राभाठा, कचंदा, घोराडीपा, जैजैपुर, डोटमा, परसदा, बरदुली, नगारीडीह एवं जमड़ी ग्राम पंचायतों में कृषक चौपाल आयोजित किए गए। कृषि चौपालों में जिले में व्याप्त जल संकट को ध्यान में रखते हुए ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की अपील की गई। आगामी खरीफ वर्ष 2026 की तैयारी के तहत फरवरी से मई 2026 तक रासायनिक उर्वरकों का अग्रिम उठाव करने की सलाह दी गई तथा संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग की जानकारी दी गई। धरती माता बचाओ अभियान’ के अंतर्गत जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। साथ ही पी.एम. आशा योजना के तहत दलहन एवं तिलहन फसलों के पंजीयन हेतु किसानों का आह्वान किया गया तथा जिले में खरीदी के लिए 06 समितियां पंजीकृत की गई हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत लंबित ई-केवाईसी, भूमि विवरण अद्यतन, आधार सीडिंग, अपात्र एवं संदिग्ध प्रकरणों के सत्यापन और सक्रिय किसानों का फार्मर आईडी निर्माण तथा जिले में ग्रीष्मकालीन धान के रकबे में कमी कर मक्का, दलहन एवं तिलहन फसलों का क्षेत्र विस्तार का कार्य सात प्रतिशत पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए। एग्रीस्टेक पंजीयन से वंचित किसानों का शिविरों के माध्यम से पंजीयन किया जा रहा है। चौपाल में फसल विविधीकरण, रबी में बीज उत्पादन कार्यक्रम लेने हेतु किसानों को जानकारी दी जा रही है जिसे उन्नत बीज के क्षेत्र में भी किसान आत्मनिर्भर हो सके, किसान क्रेडिट कार्ड (के.सी.सी.) के माध्यम से किसानों को अल्पकालीन फसल ऋण लेने हेतु जागरूक किया जा रहा है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ग्रीष्मकालीन फसल में अनुशंसित उर्वरक का उपयोग हेतु किसानों को जागरूक किया जा रहा है।

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