सक्ती- शहर की प्रमुख सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों का जमावड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। झुंड में घूमते ये कुत्ते न केवल राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा बन चुके हैं, बल्कि स्थानीय निवासियों, खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भय का माहौल बना हुआ है।
दुर्घटना और हमले की बनी रहती है आशंका
अक्सर देखा जाता है कि रात के समय या अलसुबह जब लोग टहलने निकलते हैं, तो आवारा कुत्ते अचानक हमला कर देते हैं। इसके अलावा तेज रफ्तार दोपहिया वाहनों के पीछे दौड़ने से कई बार चालक अपना संतुलन खो बैठते हैं, जिससे गंभीर सड़क हादसे घटित होते हैं। यदि समय रहते इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
नागरिकों की माँग और प्रशासन की जिम्मेदारी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शासन-प्रशासन और नगर निगम को इस दिशा में तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए। केवल खानापूर्ति करने के बजाय आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए एक विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है।
समस्या के समाधान के लिए प्रमुख सुझाव:
शहर में कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी अभियान को तेजी से और व्यापक स्तर पर चलाया जाए।
एंटी-रेबीज टीकाकरण: सभी आवारा कुत्तों का नियमित टीकाकरण कराया जाए ताकि रेबीज के खतरे से शहरवासियों को सुरक्षित रखा जा सके।
शेल्टर होम की व्यवस्था: हिंसक या बीमार कुत्तों को चिन्हित कर उन्हें सुरक्षित एनिमल शेल्टर में भेजने का प्रबंध हो। नगर पालिका द्वारा आवारा पशुओं और कुत्तों की निगरानी तथा नियंत्रण के लिए एक समर्पित टीम और हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए।
आम जनता की सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है । और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि स्थिति और गंभीर होने से पहले इस ओर विशेष ध्यान देकर त्वरित कार्रवाई करे, ताकि शहरवासी निर्भय होकर सड़कों पर आवागमन कर सकें।

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