सक्ती– सक्ती जिला मुख्यालय बने कई वर्ष हो चुके हैं, लेकिन शहर का रेलवे स्टेशन आज भी यात्री सुविधाओं के मामले में उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया है, जिसकी अपेक्षा एक जिला मुख्यालय के प्रमुख रेलवे स्टेशन से की जाती है। जिला मुख्यालय बनने के बाद प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ीं, लोगों की आवाजाही बढ़ी और दूसरे शहरों से सक्ती का संपर्क भी महत्वपूर्ण हुआ, ऐसे में रेलवे स्टेशन की सुविधाओं का विस्तार भी समय की आवश्यकता बन गया है। इसके बावजूद स्टेशन की कई मूलभूत जरूरतें अब भी सवाल बनी हुई हैं।
सबसे बड़ा सवाल अमृत भारत स्टेशन योजना को लेकर है। रेलवे के अनुसार इस योजना में देशभर के स्टेशनों को आधुनिक यात्री सुविधाओं के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। उपलब्ध आधिकारिक सूची में छत्तीसगढ़ के 32 स्टेशन शामिल हैं, लेकिन सक्ती का नाम इस सूची में नहीं है।
ऐसे में सक्ती के लोगों का सवाल स्वाभाविक है कि जब सक्ती जिला मुख्यालय बन चुका है और यहां से यात्रियों की नियमित आवाजाही होती है, तो स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल करने की आवश्यकता पर विचार क्यों नहीं किया गया? रेलवे की ओर से किसी स्टेशन का चयन उसकी श्रेणी, स्थिति और यातायात जैसे विभिन्न आधारों पर किया जाता है। लेकिन सक्ती के मामले में स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि स्टेशन की वर्तमान स्थिति और जिला मुख्यालय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसके आधुनिकीकरण की दिशा में ठोस पहल हो।
प्लेटफार्म एक से दो तक पहुंचना आज भी चुनौती
स्टेशन की दूसरी बड़ी समस्या प्लेटफार्म नंबर एक से प्लेटफार्म नंबर दो तक यात्रियों की आसान पहुंच से जुड़ी है। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांग यात्रियों के लिए ऊंची सीढ़ियों के माध्यम से आवागमन परेशानी का कारण बनता है। ऐसे यात्रियों के लिए लिफ्ट अथवा अन्य सुविधाजनक व्यवस्था कब उपलब्ध होगी, यह सवाल लंबे समय से बना हुआ है।
रेलवे स्टेशन केवल ट्रेन में चढ़ने-उतरने की जगह नहीं होता। जिला मुख्यालय के स्टेशन पर हर आयु और हर वर्ग के यात्री को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन की सुविधा मिलना आवश्यक है। फुट ओवरब्रिज को भी इस तरह सुविधाजनक और सुरक्षित बनाया जाना जरूरी है कि यात्री बिना परेशानी एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक पहुंच सकें।
बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, पार्किंग और स्टेशन सौंदर्यीकरण भी जरूरी
सक्ती स्टेशन पर यात्रियों के लिए पर्याप्त संख्या में बैठने की व्यवस्था और प्रतीक्षालय जैसी सुविधाओं का विस्तार भी समय की मांग है। ट्रेन का इंतजार करने वाले यात्रियों को यदि पर्याप्त सीट न मिले तो विशेष रूप से बुजुर्ग और महिलाओं को परेशानी होती है।
इसके साथ ही स्टेशन परिसर का व्यवस्थित सौंदर्यीकरण, पार्किंग व्यवस्था और अन्य यात्री सुविधाओं का विस्तार भी आवश्यक है। जिला मुख्यालय के रेलवे स्टेशन की पहचान केवल भवन से नहीं, बल्कि वहां मिलने वाली यात्री सुविधाओं से भी होती है।
अब सवाल मांग का नहीं, जवाबदेही का है
सक्ती के लोगों की अपेक्षाएं स्पष्ट हैं—स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए, प्लेटफार्मों के बीच आसान आवागमन की व्यवस्था हो, बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग यात्रियों को प्राथमिकता मिले, पर्याप्त बैठक व्यवस्था हो और स्टेशन परिसर का व्यवस्थित विकास किया जाए।
साथ ही अधिक यात्री ट्रेनों के ठहराव, मुंबई-हावड़ा मेल सहित पुराने रेल जुड़ाव को मजबूत करने और यात्री सुविधाओं के विस्तार की मांग भी समय-समय पर उठती रही है।
अब सवाल यह है कि जिला मुख्यालय बनने के बाद सक्ती रेलवे स्टेशन के विकास को प्राथमिकता कब मिलेगी? रेलवे अधिकारी इस दिशा में क्या योजना बना रहे हैं और जनप्रतिनिधि इस मांग को रेलवे तक प्रभावी ढंग से कब पहुंचाएंगे? क्या सक्ती को उसके जिला मुख्यालय के अनुरूप रेलवे स्टेशन मिलेगा, या यात्रियों को सुविधाओं के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा

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